आजकल की खराब जीवनशैली, अनियमित खानपान, तनाव और शारीरिक कमजोरी के कारण खून की कमी, शरीर में सूजन, थकान और पाचन संबंधी समस्याएं बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग कमजोरी और low hemoglobin के लिए iron supplements लेते हैं, लेकिन केवल iron लेने से हमेशा पूरी समस्या ठीक नहीं होती, क्योंकि शरीर में पाचन शक्ति और पोषक तत्वों का सही अवशोषण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। आयुर्वेद में ऐसी स्थितियों के लिए कई पारंपरिक औषधियों का वर्णन मिलता है, जिनमें पुनर्नवादि मंडूर एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रभावी formulation मानी जाती है। यह औषधि विशेष रूप से पांडु रोग अर्थात खून की कमी, शरीर में सूजन, कमजोर पाचन, और यकृत संबंधी समस्याओं में उपयोग की जाती है।
पुनर्नवादि मंडूर क्या है?
पुनर्नवादि मंडूर आयुर्वेद की एक पारंपरिक Herbo Mineral औषधि है, जिसका मुख्य घटक मंडूर भस्म होता है। मंडूर भस्म को आयुर्वेद में शुद्ध किए गए लौह से तैयार किया जाता है और इसे रक्तवर्धक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में खून की कमी केवल iron deficiency से नहीं होती, बल्कि कमजोर अग्नि, खराब पाचन और रस धातु के सही निर्माण न होने के कारण भी हो सकती है। इसलिए पुनर्नवादि मंडूर में पुनर्नवा, त्रिफला, पिप्पली, चित्रक, सौंठ और अन्य औषधियों को मिलाया जाता है ताकि यह केवल रक्त बढ़ाने तक सीमित न रहे बल्कि पाचन शक्ति और शरीर की पोषण क्षमता को भी सुधार सके।
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आयुर्वेद के अनुसार पुनर्नवादि मंडूर
आयुर्वेद में किसी भी रोग को केवल symptoms के आधार पर नहीं देखा जाता बल्कि उसके मूल कारण को समझने का प्रयास किया जाता है।
- पांडु रोग में भूमिका- आयुर्वेद में anemia को “पांडु रोग” कहा गया है। इसमें व्यक्ति के शरीर में कमजोरी, थकान, चक्कर, त्वचा का पीला पड़ना और ऊर्जा की कमी दिखाई दे सकती है। आयुर्वेद के अनुसार जब जठराग्नि कमजोर हो जाती है तो भोजन ठीक प्रकार से पच नहीं पाता। इससे शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता और धीरे-धीरे रक्त धातु कमजोर होने लगती है। माहवारी के कारण ये महिलाओ में ज्यादा देखने को मिलता है । पुनर्नवादि मंडूर इसी स्तर पर कार्य करने का प्रयास करती है। इसमें मौजूद मंडूर भस्म रक्त निर्माण को support कर सकती है जबकि त्रिकटु और चित्रक जैसी औषधियां अग्नि को सुधारने में सहायता करती हैं।
- सूजन और जल संचय में लाभ- जब शरीर में अतिरिक्त जल रुकने लगता है तो पैरों, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन दिखाई देने लगती है। आयुर्वेद में इसे “शोथ” कहा जाता है। पुनर्नवा को आयुर्वेद में एक श्रेष्ठ मूत्रल द्रव्य माना गया है। यह शरीर से अतिरिक्त जल को बाहर निकालने में सहायता कर सकती है, जिससे सूजन और भारीपन कम होने में मदद मिल सकती है।
- पाचन शक्ति सुधारने में- यदि किसी व्यक्ति को भूख कम लगती हो, गैस, अपच या पेट में भारीपन रहता हो तो यह formulation digestion support के लिए उपयोग की जा सकती है। इसमें मौजूद त्रिकटु और चित्रक अग्नि को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं, जिससे भोजन का पाचन और पोषण तत्वों का अवशोषण बेहतर हो सकता है।
- कमजोरी और थकान में- जो लोग हर समय low energy महसूस करते हैं या थोड़ा काम करने पर भी जल्दी थक जाते हैं, उनमें यह formulation लाभकारी हो सकती है, विशेष रूप से यदि कमजोरी anemia या खराब metabolism से जुड़ी हो।इसके उचित उपयोग से शरीर की ऊर्जा और कार्यक्षमता में सुधार देखने को मिल सकता है।
पुनर्नवादि मंडूर के घटक
पुनर्नवादि मंडूर में कई महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग किया जाता है। पुनर्नवादि मंडूर के फायदे उसमें मौजूद सहायक जड़ी-बूटियों के कारण भी होते हैं।
- पुनर्नवा- यह औषधि शरीर से अतिरिक्त द्रव (toxins) को बाहर निकालने, सूजन कम करने और मूत्र संबंधी कार्यों को support करने में उपयोगी मानी जाती है।
- मंडूर भस्म- यह formulation का मुख्य घटक है, जिसे आयुर्वेदिक लौह स्रोत माना जाता है। यह रक्त धातु को पोषण देने में सहायक हो सकता है।
- त्रिफला- त्रिफला शरीर की सफाई करने, पाचन सुधारने और metabolism को संतुलित रखने में उपयोगी मानी जाती है।
- त्रिकटु- इसमें सौंठ, काली मिर्च और पिप्पली शामिल होती हैं। यह अग्नि को बढ़ाने और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाने में सहायता कर सकती है।
- चित्रक- चित्रक पाचन शक्ति और metabolism को सुधारने में उपयोगी माना जाता है।
- विडंग और देवदारु- ये औषधियां शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने और digestion support में सहायक मानी जाती हैं।
पुनर्नवादि मंडूर सेवन विधि
हालांकि यह एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि है, लेकिन इसका सेवन हमेशा उचित मात्रा और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
- पुनर्नवादि मंडूर की 1–2 गोलियां दिन में 1 या 2 बार दी जाती हैं, लेकिन सही मात्रा व्यक्ति की उम्र, प्रकृति, पाचन शक्ति और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।
- इसे गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए ?
गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं, छोटे बच्चों और chronic liver या kidney disease से पीड़ित लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए। जिन लोगों में शरीर में पहले से iron अधिक हो या जो पहले से iron supplements ले रहे हों, उन्हें भी सावधानी रखनी चाहिए।
आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन हमेशा विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के बाद ही करना चाहिए। आप अपना अकाउंट बनाकर Purshveda के माध्यम से consultation बुक कर सकते हैं, जहाँ 80 से अधिक अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सक उपलब्ध हैं। Purshveda को आयुर्वेद के क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है तथा यहाँ विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा तैयार की गई आयुर्वेदिक औषधियाँ उपलब्ध हैं।
FAQs
1. पुनर्नवादि मंडूर का असर कितने दिनों में दिखाता है?
पुनर्नवादि मंडूर का असर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और समस्या पर निर्भर करता है। सामान्यतः नियमित सेवन से कुछ हफ्तों में कमजोरी, सूजन और पाचन में सुधार महसूस हो सकता है।
2. पुनर्नवा और पुनर्नवादि मंडूर में क्या अंतर है?
पुनर्नवा एक अकेली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जबकि पुनर्नवादि मंडूर कई औषधियों और मंडूर भस्म से मिलकर बनी एक आयुर्वेदिक formulation है।
3. पुनर्नवादि मंडूर खाने के क्या फायदे हैं?
पुनर्नवादि मंडूर खून की कमी, शरीर की सूजन, कमजोरी और कमजोर पाचन में लाभकारी मानी जाती है। यह शरीर की ऊर्जा और रक्त धातु को support करने में मदद कर सकती है।
निष्कर्ष
पुनर्नवादि मंडूर आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध formulation है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से खून की कमी, सूजन, कमजोर पाचन और liver support के लिए किया जाता है। हालांकि इसके कई संभावित फायदे हैं, लेकिन इसका सेवन हमेशा Ayurvedic practitioner की सलाह से ही करना चाहिए। सही आहार, संतुलित lifestyle और उचित चिकित्सा मार्गदर्शन के साथ यह formulation overall wellness और ऊर्जा support में लाभकारी साबित हो सकती है।